कर्ण पिशाचिनी-एक अनोखी कहानी Part-5 [अंतिम भाग ]
कर्ण पिशाचिनी-एक अनोखी कहानी Part-4 वाले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे कर्ण पिशाचनी का प्रेत साधक के घर में जाकर कैसे एक व्यक्ति को मार डालता है और सभी लोगों को डराता है । अब इस भाग में जोकि इस कहानी का अंतिम भाग है इसे पढीये और आगे कि कहानी को जानिए ।
अब आगे:
बाकी के कुछ लोग जो घर में होते वो भी बाहर आकर देखने की कोशिश करते है पर जैसे ही वो दरवाजे के पास पहुंचते है दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है घर में बचे हुए कुछ लोग जबरदस्ती उस दरवाजे को खोलने की कोशिश करते पर दरवाजा ऐसा लग रहा था जेसे दरवाजा ना होकर एक दीवार बन गयी हो
सभी
लोग बहुत बुरी तरह से डर जाते
है और चिल्लाने लगते
है जिसे सुनकर गाँव के सभी लोग
घर कें बाहर इकठठा हो जाते है!
और दरवाजे को खोलने लगते
हे परंतु दरवाजे को कुछ भी
नही होता है सभी लोग
उस दरवाजे कों तोडने की भी कोशिश
करते है परंतु असफल
रहते है सभी लोग
सिर्फ घर कें अंदर
से आ रही आवाजो
को सुन रहे होते है! और इधर घर
के अंदर प्रेत सभी लोगों को डराता है
प्रेत सभी लोगो को हवा में
उठाकर पटक रहा होता हैं जिसमे एक व्यकित घर
के उपर जाने वाले सीढी पर गिर जाता
है जिससे उसकी कमर टुट जाती है प्रेत बहुत
खुशी से हसता है
और एक दुसरे व्यक्ति
के अंदर घुस जाता है
वह जिस व्याक्ति के अंदर घुसता है वह अपने शरीर कों अजीब तरह सें ऐठने और मोडने लगता है जिससे उसके शरीर कीं भी लगभग सारी हड्डिया टुट जाती है और फिर वह प्रेत हसने लगता है जिसे देखकर वह व्यक्ति जिसकी कमर टुट गयी थी वह परेशान हो जाता है और दर्द और डर से चिल्ला चिल्लाकर रोता है तभी वो प्रेत उस व्यक्ति के शरीर से बाहर आता है और वह व्यक्ति मर जाता है उस प्रेत के भयावह रूप को देखकर कमर टुटा व्याक्ति बेहोश हो जाता है
अब उस घर मे एक आखिरी व्यकित बचता है जो एक दीवान पंलग के नीचे घुपा होता है उसे किसी व्यक्ति के चलने की आवाज आती है वह अपने आँखे बंद करके चुप चाप सुन रहा होता है तभी प्रेत उसका पैर खीचकर पंलग से बाहर निकाल देता है। वयक्ति चिल्लाता है चिख्ता है परंतु कोई भी व्यक्ति उसकी मदद के लिए नही आ पाता व्यक्ति बहुत बुरी तरफ से रोता है और प्रेत सें आग्रह करता है कि वह उसे छोड दे तभी उसे अपने कानो मे कुछ फुस-फुसाने की आवाज आती है व्यक्ति अपने दोनो हाथों से कान को बंद कर देता है ताकि उसे वह आवाज सुनाई ना दे परंतु वह आवाज अधिक तीव्रता से बढ़ती है और व्यक्ति के कानो में चुभने लगती है व्यक्ति के कानो से खुन बहने लगता है और उसके मस्तिष्क मे बहुत दर्द शुरु हो जाता है जैसे कोई उसके सिर मे कोई कील को चुभा रहा हो व्यक्ति अपने पैरो को जमीन पर पटकता है परंतु उसे दद से राहत नही मिलती
व्यक्ति तभी प्रेत को बोलता है कि मै और मेरा परिवार ये घर छोड कर चले जायेगे मुझे छोड दो! तभी घर मे अचानक से शांति हो जाती है सब कुछ सामान्य हो जाता है। व्यक्ति रोता हुआ घर के दरवाजे के पास जाता है और उसे खोलने की कोशिश करता है परंतु जैसे ही वह दरवाजे को छुता है एक अदृश्य शक्ति उसके पैरों को खींचते हुए उसे हवा मे उल्टा लटका कर घर के उपर के मंजिल के कमरे मे लेकर जाता है और खिडकी के पास छोड देता हैं तभी खिडकी खुलती है और व्यक्ति बाहर देखकर चिललाने लगता है और मदद के लिए रोते हुए आवाज लगाता है सभी घर के बाहर खडे लोग उसे देखते है और सभी चिल्लाने लगते है क्योकि उसके पीछे एक भयानक साया खडा होता है यह दृश्य देखकर सभी बाहर खडे लोगो मे डर का माहोल बन जाता है
सभी लोग चिल्लाने लगते है तभी वह भयानक साया जोकि वह प्रेत ही होता है वह उस व्यक्ति के मुह के अंदर एक काली सी धुवा बनकर घुसता है व्यक्ति संतंभ होकर खङा होता है सभी लोग शांत होकर उस व्यक्ति को देख रहे होते हैं तभी वह व्यक्ति अचानक से खिड़की के पास से गायब हो जाता है उस घर की दोनो औरते जो बचकर घर से पहले ही बाहर आ गई होती है दोनो दरवाजे को पढ़कर रो रही थी कि तभी दरवाजा खुलता है और
वह व्यक्ति खुन से सना हुआ बाहर आता है सभी लोग उसे देखते है उसकी आँखे पुरी तरह से लाल होती है जैसे आँखो के अंदर कोयला जल रहा हो व्यक्ति अपने काबु मे नही होता वी दोनो औरते उसे पकड़कर रोने लगती है तभी वह व्यक्ति जोर जोर से हसता है सभी लोग उसे हस्ता देख और भी डर जाते हैं तभी वह व्यक्ति रोने लगता है और उसके अंदर से कई अलग अलग लोगों के रोने की आवाजे आती है व्यक्ति अचानक से जमीन पर गिर जाता है और और अपने हाथ पैर पटकने लगता है उसका शरीर से बहुत सारे आत्माओं के रोने की आवाजे निकल रही थीं व्यक्ति के मुँह से खुन की धारा बह्ती है और व्यक्ति का शरीर काला पड़ जाता है
कुछ समय के बाद व्यक्ति का शरीर एक अकड़ने लगता है और व्यक्ति खामोश पड़ जाता है सभी लोग उसके पास आते हैं और उसे छु कर उठाने की कोशिश करते हैं परन्तु व्यक्ति के कोई जवाब ना देने के बाद लोग समझ जाते हैं कि व्यक्ति की मृत्यु हो गई है तभी उस व्यक्ति के मुह से काला सा धुवां निकलता है और हवा मे गायब हो जाता है सभी लोग डरकर सारा नज़ारा देख रहे होते हैं परन्तु किसी कि भी हिमम्त उसके पास जाने की नही होती। उस घर की दोनों महिलाए रो रोकर बेहोश हो जाती है । तभी भीड मे से एक व्यक्ति जो कि उस गाँव पुजारी होता है वह आकर उन औरतों को उठाते है और कहते हैं कि आप दोनों इस घर को छोड़ कर चले जाओं यह घर श्रापित हो चुका है। अब यहाँ नही रहा जा सकता। सभी लोग सुबह का इंतजार कर रहे थे और कुछ समय बाद सुबह हो जाती है । सुबह होते ही ये खबर दूर दूर तक के गाँव मे फैल जाती हैं कि कुछ लोग प्रेत के हाथो मारे गए हैं । सुबह साधक अपने घर पर आते है और ये सब नजारा देख कर सारा विवरण समक्ष जाते है कि कर्ण पिशाचनी क्या क्या कर सकती हैं साधक को देख कर लोग उन्हे सारी घटना को बताते है साधक उन औरतो के पास जाते हैं और उन्हें अपने किसी रिश्तेदार को बुलाकर सभी सवो का अंतिम संस्कार करवाने के लिए बोलते हैं ।
सभी गांव के लोग उन मृत शरीर को घर से बाहर निकाल कर उनके अंतिम संस्कार कें कार्य मे जुट जाते हैं । साधक भी सवो के अंतिम संस्कार मे मदद करते हैं और समशान भुमि मे सवो को सारी प्रक्रिया के द्वारा उनका अंतिम संस्कार करवा देते हैं । अंतिम संस्कार के बाद सभी लोग अपने अपने घर चले जाते हैं । साधक भी अपने घर वापस आते हैं और उन औरतो को रोता देख कर उन्हे कुछ दिन रुककर वहां से जाने के लिए बोल देते हैं तभी वहाँ उन औरतो के कुछ रिश्तेदार वहाँ आते जिसे उन्ही का कोई नौकर लेकर आया होता है । वह औरते रोते हुए रिश्तेदारो को सारी घटना बताती हैं सभी लोग सुन कर डर जाते है तथा उन औरतो को अपना सामान लेकर चलने को कहते हैं औरते रोते हुए अंदर जाती हैं और थोडी देर बाद अपना सामान लेकर बाहर आती हैं और घर को बंद करने लगती हैं तभी साधक उन्हे रोक देते हैं और दरवाजे को धक्का मारकर खोल देते हैं । सभी लोग उन्हें देखते है तभी साधक कहते हैं ये मेरा घर है यह तभी बंद होगा जब मेरी इच्छा होगी यह बात सुनकर एक रिशतेदार साधक से पुछता है कि आप कौन हैं तो साधक उनसे कहता है कि यह घर मेरा है जिसे इन लोगों ने जबरदस्ती कब्जा लिया है इसलिए इन्हें आज इन परिस्थियोंसे गुजरना पड़ रहा है अगर ये लोग मेरी बात मान कर इस घर को खाली कर देते तो आज ये सब नही होता । यह बात सुनकर वो व्यक्ति उनसे माफी मांगता है और उन औरतो को लेकर वहाँ से चले जाते हैं '
सभी लोगों के जाने के बाद कुछ लोग साधक के पास आते हैं और उन्हें उस घर मे रहने से मना करते हैं परन्तु साधक उन लोगों से कहते हैं कि मुझे कोई भी कुछ हानी नही पहुंचा सकता । और साधक घर के अंदर जाकर पुरे घर को देखते है । घर काफी अच्छा होता है । तभी वो कर्ण पिशाचनी साधक के पास आती हैं और अपने शक्तियो से पुरे घर के दरवाजे और खिड़कियों को बंद कर देती हैं । और साधक से कहती हैं मैंने तुम्हारी इच्छा को पूरा किया है तुम मेरी इच्छा को पूरी करो । साधक कर्ण पिशाचनी से पुछते है कि क्या है तुम्हारी इच्छा?
कर्ण पिशाचनी कहती है मेरी इच्छा तुम्हारे साथ तीव्र सम्भोग करने की हो रही है। और वह साधक के शरीर से चिपक जाती है और अपनी बडी सी जीभ निकालकर साधक को चाटने लगती हैं और साधक को पूरी तरह से नग्न कर देती हैं और खुद भी नम्न होकर साधक के साथ तीव्र काम क्रीडा करती हैं । अब साधक भी कर्ण पिशाचनी के आदी हो जाते हैं और कर्ण पिशाचनी साधक के साथ उस घर में रहती हैं परन्तु वो सिर्फ साधक को ही दिखाई देती हैं । साधक के अलावा कर्ण पिशाचनी को कोई भी नही देख पाया।
साधक उस घर में अच्छे से रहने लगते हैं तथा गाँव मे भी वो अपनी विद्या से सबकी मदद करते हैं कुछ साल यूंहि बितने के बाद सभी लोग जान जाते हैं कि साधक कोई आम व्यक्ति नही है बल्कि यह एक काली शक्तिओं का मालिक है । लोगो का कहना था कि साधक अपने घर में किसी से बातचीत करते हैं परन्तु उन्हे उनके घर मे साधक के अलावा कोई भी नही दिखाई देता था । गाँव के लोगों ने यह भी बताया है कि साधक रात्री में कभी जंगल मे तो कभी अपने घर पर तांत्रिक विद्याये भी करते थे और साधक के घर से रात्री में कुछ अजीब रोने और चिल्लाने कि आवाज़ भी सुनाई पड़ती थी धीरे धीरे साधक को लोगों ने एक तांत्रिक ही मान लिया और उनसे तंत्र विद्या भी करवाई । परन्तु लोगो का कहना है कि वह एक रात कोई अनुष्ठान कर रहे थे जिसके बाद वह अपने ही घर से रहस्यमी रुप से गायब हो गए और आज तक नही मिले । आज भी वह घर भोपाल में खंडर के रूप में है जिसके अंदर जाने पर लोगो को कुछ नकारात्मक ऊर्जा का एहसास होता है और घर मे बहुत सारी चीज़ें जैसे मटके साधना और हवन सामग्री मिलती हैं ।
अगर
कर्ण पिशाचनी साधना या प्रयोग के
बारे में कोई व्यकित जानना चाहता है तो वो
इस कर्ण पिशाचिनी और उसकी साधना की पूरी प्रक्रिया|karna
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परन्तु इस अनुष्ठान को
किसी गुरु की छत्रछाया मे
ही करे ।
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crazyhorrormint के सभी पाठको को धन्यवाद जो Crazyhorrormint के सारी कहानियो को पढ्ते है कर्ण पिशाचिनी-एक अनोखी कहानी कहानी का अंत यही हो चुका है तथा कर्ण पिशाचनी से सम्बधित और भी सच्ची कहानियां इस Crazyhorrormint पर आती रहेगी जिसे पढकर आप और भी रोमांचित महसूस करेगे ।
Crazyhorrormint पर और भी कहानियां प्रसारित की जाती है जोकि भूतिया, रहस्यमययो से भरी हुई, असाधारण , डरावनी होती हैं कृपया उन्हे भी पढ़ें और रोमाचित हो जाए ।
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