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कर्ण पिशाचिनी या उर्वशी- एक सच्ची कहानी

 

Crazyhorrormint फिर से लेकर आया है एक सच्ची कहानी जो कि एक कर्ण पिशाचनी पर आधारित अगर आपने हमारी पिछली कहानी कर्ण पिशाचिनी-एक अनोखी कहानी को पढ़ा होगा तो आपको कर्ण पिशाचनी के बारे मे अवश्य पता चला गया होगा कि कैसे कर्ण पिशाचनी की साधना करके उसे हासिल किया जाता है और वह किस प्रकार साधको की मदद करती है । यह कहानी भी एक विचित्र कर्ण पिशाचिनी पर ही आधारित है । चलिए अब कहानी पर आते हैं ।

                                        

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यह कहानी उड़ीसा के एक वरिष्ठ अधिकारी दया सिंह जोकि जंगल के Forest officer थे उनकी है ये कहानी उनके एक मित्र सिफल द्वारा भेजी गई है जो उन्ही के साथ Forest officer है इस कहानी के जो मुख्य charactor है उन सभी के नामों को बदल दिया गया है ताकि उनकी life के बारे में किसी को भी कोई जानकारी ना हो तो चलिए शुरु करते हैं

 

दया जी जोकि उड़ीसा के एक क्षेत्र मे अधिकारी है उनका रोज का एक ही काम है पुरे उस क्षेत्र के जंगल की निगरानी करना और सारे पेड़ों और जंगल मे रहने वाले जीवो की सुरक्षा करना दया और उनके मित्र सिफल दोनो एक साथ ही पुरे क्षेत्र में अपने कुछ और सह- क्रमियो के साथ डियुटी करते थे। पहले कुछ वर्ष तो सब कुछ सामान्य था परन्तु जानवरो के तश्करी और पेड काटने जैसी समस्याएँ आमतौर पर उत्पन्न होती थी। और कभी कभार तस्करो से आमना सामना भी हो जाता था। परन्तु इसमें कोई भारी नुक्सान नहीं हुआ।


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पर वर्ष २००५ मे एक ऐसी घटना हुई जिसमे उस पुरे क्षेत्र मे डर का माहोल बना दिया। एक दिन एक वन अधिकारी रात्री मे करीब 10:30 बजे अपने निर्धारित डियुटी के अनुसार जंगल में गसत् लगाने के लिए गया। जोकि रात्रि के 1:00 तक गस्त को पुरा करके अपने Forest office मे वापस जाता था। परन्तु उस रात वह अपने समय पर वापस नही आया तो office के अंदर हलचल मच गई सभी को लगा कि शायद बारिश की वजह से कहीं फस गया होगा इसलिए समय लग रहा है परन्तु करीब एक घंटे बाद भी उसके ना आने पर वन अधिकारी के पुरी टीम ने उसे जंगल में जाकर लाने का फैसला किया ऑफिस मे बस एक दो स्टाफ को छोड़ कर पुरा स्टाफ उसे लेने के लिए जंगल में चले गए सारे स्टॉफ के लोग अपनी टीम बनाकर अलग अलग दिशाओ मे फैल गये और उसे ठुठने लगे परन्तु किसी को भी वह ऑफिसर नही मिला तभी एक ऑफिसर की आवाज सब ने अपने वायरलेस पर सुना कि यहॉ पर कुछ असामान्य घटना हुई है पुरी टीम वहाँ पर पहुंचती है और देखते है कि किसी वस्तु को कोई जानवर घसीट कर झडियों से होते हुए हलके ढलान से ऊपर की ओर ले गया है सभी लोग घने झाडियो से होते हुए उपर जाते हैं और घसीटने के निशान का पीछा करते हुए एक स्थान पर पहुंचते हैं जहाँ कुछ फटे हुए कपड़े मिलते है कपड़ो को देखकर सबकी सांसे तेज हो जाती हैं तभी उनका एक सहकर्मी ऊपर की ओर जाता है और थोड़ी सी ढलान पर चढते हुए घने झाडियो को पार करके एक ऐसी जगह पर पहुंचता है जहाँ कुछ बडे चटटान होते है हर तरफ बस शांति होती है एक भी जीव की आवाज नही सुनाई पड़ती है। ऐसा लगता है कि घोर शांति और सनाटा मे कोई चीज उन् पर नजर रख रही है तभी सभी फॉरेस्ट ऑफिसर वहाँ पहुंचते है और अपने टॉर्च की रोशनी से इधर उधर देखते हैं और जैसे ही ऊपर की तरफ टॉर्च की रोशनी को पेड पर डालते हैं सभी लोग सुनन पड़ जाते है बिलकुल सत्बध, हैरान अपने चेहरे के भाव को लेकर एक दुसरे की तरफ देखते है तभी एक ऑफिसर कहता है क्यॉं ये दीप सिंह है

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दीप सिंह जिसकी लाश पेड पर उल्टी लटकी हुई होती है ऐसा लग रहा था जैसे उसे पहले कीसी ने बुरी तरह से घसीटा हो जिससे उसके कपड़े घसीटने के दौरान फट गये। और फिर खडी ढलान के उपर लाकर उसे किसी ने अपने दांतों नाखुनो से उसके शरीर पर हमला करके उसके शरीर को फाड़ दिया हो। और उसके खुन की पीया और शरीर के अलग अलग भागो को खाया हो सभी लोग इस दृश्य को देखकर हिम्मत नही जुटा पा रहे थे उससे पेड से उतारने के लिए तभी दो फॉरेस्ट गार्ड पेड पर चढ़ते हैं और दीप सिंह की आधी लाश को पेड से नीचे उतारते हैं   तभी एक ऑफिसर अपने ऑफ़िस मे वायरलेस से मदद भेजने को कहता है  और दीपसिंह के मौत की खबर देता हैं सभी लोग दीप सिंह के कट्टे हुए अंगो को ढूंढ़ते है। पर उनहे हाथ के सिवा और कुछ नहीं मिलता सभी लोग दिप सिंह के लाश को घेरकर खड़े होते हैं सभी को डर की अनुभुति होती हैं तभी दया सिंह के वायरलेस पर ओडियो संदेश आता है कि बाकि कें कुछ और ऑफिसर दिप सिंह के मृत शरीर को लेने चुके हैं तथा उन्हे उस स्थान पर आने के लिए सहायता चाहिए तभी दया सिंह सिफल और एक और सहकर्मी को वापस जाकर दूसरी टीम को इस स्थान पर लाने के लिए बोलते हैं सिफल और अन्य सहकर्मी दूसरी टीम को लाने के लिए चले जाते हैं तभी बारिश और तेजी सें शुरु हो जाती हैं हर तरफ बस घनघोर अंधेरा होता है और बारिश के बुंदों की आवाज रही थी अचानक एक आफिसर दया सिंह को कहता है सर पीछे देखिए आपके पीछे कोई हैं

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दया सिंह पीछे मुड़कर देखता है पर वहा कोई भी नहीं था दया कहते है लगता है कोई जानवर है तभी उनके बगल के झाड़ियों मे बहुत तेज हलचल होती हैं सभी लोग चट्टान पर चढ जाते है और टॉर्च की रोशनी झाडियो के तरफ करके देखते हैं कि झाड़ियों से कैसी आवाज रही है परन्तु वहाँ कोई भी जीवित चीज नजर नहीं आती तभी एक ऑफिसर अपनी बंदुक कंधे से उताकर हाथ में लेकर बंदुक को लोड करता है और झाड़ियों की तरफ तान कर खड़ा हो जाता है उसे देख कर दया सिंह भी अपनी पिस्तौल को हाथ मे लेकर झाडि की तरफ तान देते हैं परन्तु कोई भी जानवर झाडी मे दिखाई नहीं देता और तभी सिफल दूसरी टीम के साथ वहा पर जाता है और उन सभी को बंदुक हाथ मे लिए हुए देख कर पुछता है क्या यहा पर सब कुछ ठीक हैं

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दया सिंह सिफल को कह्ते है कि यहा पर शायद कोई जंगली जानवर है जो झाडियो मे छिपा हुआ है उसने ही दीप को मारा है बाकी की टीम भी दीप सिह की लाश को देखकर पूरी तरह से सहम जाते हैं और कुछ मुआयना करके पूरी टीम थोड़ी ही देर में दीप की लाश को एक स्ट्रेचर पर रख कर ढलान से होते हुए जंगल से बाहर निकलने लगते हैं कि तभी तेज रफ़्तार से हवाए चलती है और पूरे जंगल मे डर का एक आंतक छा जाता है हवाएं ठण्ड से भर जाती हैं हर तरफ अंधेरा तीव्र तरीके से बढ रहा था और सिर्फ बारिश और हवाओ की आवाज के अलावा कुछ भी सुनाई नही दे रही थी। जब सभी लोग जंगल से बाहर निकल रहे होते हैं तब उन सभी को ऐसा महसूस होता है जैसे कोई अदृश्य चीज उनके साथ चल रही हो जो कि उन सभी के साथ कदम मिलाकर पीछे चल रही है सभी लोगों को एक ही आवाज सुनाई पड़ती है क़दमों की आवाज जो कि पीछे से रही होती हैं तभी दया सिंह सब को रुकने को बोलते हैं और सभी लोग रुक जाते हैं उनके रुकते ही वह आवाज भी रुक गई जो उनके पीछे से रही थी कुछ पल रुकने के बाद वह सबको चलने के लिए बोलते हैं और सभी लोग चल पड़ते हैं कुछ देर ढलानी चटटानो और झाडियो को पार करके वह नीचे पर आते हैं कि तभी वह आवाज फीर से आती है सभी लोग दीप सिंह की लाश को लिए हुए रुक जाते हैं और वह आवाज भी रुक जाती है सभी लोग अपने चारो तरफ टॉर्च की रोशनी फैलाते हुए देखते हैं कि उनका पीछा कौन कर रहा है और वह दिखाई क्यु नही दे रहा है

सभी लोग जवाब ढुढते हुए एक दूसरे की तरफ देखते है कि तभी दूसरी टीम का गार्ड कहता है कि शायद कोई जानवर उनका पीछा कर रहा है। और सभी लोगों को दीप सिंह की लाश को घेर कर चलने के लिए बोलता है तभी सब लोग सावधान होकर अपने बंदुकें हाथ में लेकर तैनात होकर चारो तरफ घात लगा कर चलने लगते है ताकि कोई जानवर उन पर हमला करे तो वह उसे मार सके।

तभी दया सिंह उन् सभी से बोलते हैं " यहाँ कोई जानवर है जो दीप के खुन के कारण आकर्षित हो रहा है और हमारा छुप कर पीछा कर रहा है " और यह बोलकर सभी लोग वापस से घात लगाकर जंगल से निकालने लगते है।

कुछ पल बाद कदमों की आवाज फीर से शुरु हो जाती है और इस बार आवाज बहुत ही तेज और पास से आती है जोकि उनके चारो तरफ से रही थी उन सभी को ऐसा लग रहा था कि कोई व्यक्ति उन सभी के चारो तरफ गोल गोल तेजी से चक्कर लगा रहा है कभी वो चप चप चप चप और कभी ढप ढप ढप ढप की आवाज उनके कानो मे पड रही थी वह चप चप चप चप की आवाज उन्हें चारो तरफ से घेर चुकी थी परन्तु नजर नहीं रही थी आवाज को पास से आते हुए देख सभी लोगों के अंदर एक डर जाता है और सभी लोग तेजी से चलना शुरू कर देते हैं और जंगल मे जहा पर उन फारोस्ट गार्ड( दुसरी टीम) ने अपनी गाड़ी को खडी कर के आये होते हैं वहा पहुच जाते हैं और दीप सिह के लाश को गाड़ी में रखकर सभी लोग गाड़ी में बैढ़ते है। और जगल के सकीरे और तेड़े रास्ते से होते हुए जगल से पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं और जंगल से बाहर बने हुए चेक पोस्ट पर आकर रुकते हैं एक टीम चेक पोस्ट पर रुक जाती है और दूसरी टीम लाश को लेकर वन अधिकारी के कार्यालय लेकर जाती है जब दया सिंह और सिफल कुछ अन्य गार्डस के साथ चेक पोस्ट पर ही रुक जाते हैं   सभी लोग जंगल की ओर देखते हुए आपस में बात कर रहे थे कि शायद जंगल में कोई खुनखार जानवर गया है जिसने दीप सिंह को गस्त के दौरान हमला कर उसकी जान लें ली है और अब जंगल में सभी लोगो को सावधानी से गस्त लगाना होगा कि तभी एक तेज बिजली चमकती है जो जंगल के पहाड़ पर गिरती है और पूरे जंगल में थोड़ी देर के लिए रोशनी छा गई यह पहली बार था जब सभी प्रकृति की एक ऐसी असामान्य घटना की देख रहे थे कि तभी अचानक से अचानक से जंगल में से तेज तेज  किसी औरत के चिल्लाने की आवाज आई आवाज इतनी तेज थी कि ऐसा लग रहा था जैसे कोई औरत किसी के वियोग में रो रही हो आवाज से गूंज कर बाहर तक रही थी सभी चेक पोस्ट पर रुके हुए आफिसर्स और गार्डस पुरी तरह से हैरान हो गए कि जगल मे क्या गतिविधि चल रही थी। जंगल अचानक ही इतना खतरनाक और भयावह कैसे हो गया।

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जंगल से बार बार स्त्रियो के रोने और विलाप करने की आवाज रही थी वो आवाज रो रो कर ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बताना चाहती हो किसी को मदद के लिए बुला रही हो ये देखकर एक आफिसर कहता है कि हमे जंगल में जाकर देखना चाहिए कि वहाॅ कौन सी औरत है जो लगातार रोये जा रही हैं पर दया सिंह सभी को जंगल में जाने से सभी को रोक देते हैं  और सुबह का इंतजार करने को कहते है

सुबह सभी ऑफिसर और गार्डस, रेनजर वन अधिकारी कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए और सभी लोगो ने दीप सिह को श्रद्वाजली दी और उसके मृत शरीर को शीशे से बने हुए बकसे मे बर्फ के साथ एक एम्बूलैंस में डालकर उनके घर के लिए कुछ गार्डस के साथ भेज दिया गया और सभी लोगों को उस जंगली जानवर को ढुढकर उसे पकड़ने को बोला गया। सभी फारेस्ट गार्डस, रेन्जर और वरिष्ठ आफिसर्स अपने हथियार को लेकर गाड़ीयों में बैठे और तुंरत ही जंगल में दाखिल हो गये और अलग अलग जगह से घात लगाकर उस जानवर को ढुढने लगे सभी आफिसर जंगल मे मौजुद सभी गांव वालों को जंगल से बाहर निकल जाने का आदेश दिया जानवर को ढुढ़ते समय वो बहुत से गाँव वालो को मिले जो उस वक्त जंगल में लकडिया और फल लेने आये थे सभी गार्डस ने उन सभी को जंगल आने की चेतावनी दी और जल्द ही जंगल से लकड़ी लेकर बाहर अपने गाव जाने को बोला।

लगभग पाँच घण्टे के छानबीन और तलाश के बाद भी उन्हे कोई भी खुंखार जानवर नही मिला सभी लोगो ने एक दूसरे से अपने अपने वायरलेस से कनेक्ट किया और पुछा कि किसी को कोई जानवर नजर आया या नही परंतु सभी का एक समान जवाब पाकर वरिष्ठ अधिकारी ने सब को तलाश खत्म करके अपने अपने  गाड़ी के पास वापस आने को कहा। लगभग सांय होने को था जंगल मे वन अधिकारीयों को ना ही कोई जानवर दिखा और ना ही कोई उस स्त्री के आवाज का कोई सुराक ही मिला तभी दया सिंह को वायरलेस पर दूसरी टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी का आडियो मेसेज आया कि सभी लोग अपनी गाड़ी के पास वापस लोटे सांम हो चुकी है बाकि की तलाश कल कि जाएगी दया सिंह और उनकी पुरी टीम वापस अपने गाड़ी के पास आते हैं जहां पहले से ही एक दस लोगों की टीम उनका इंतजार कर रही थी उन्हे देखकर उस टीम का वरिष्ठ अधिकारी उनसे पास आता है और कहता है कि हमारी तीसरी टीम अभी भी जंगल मे है दया सिंह उस टीम से कान्टेक्ट करते हैं और उनका कुछ पल इंतजार करते हैं थोड़ी ही देर मे तीसरी टीम भी अपने सभी गार्डस के साथ उनके पास आती है और कहती है कि शायद जंगल मे कोई जानवर नही है बल्कि कोई तश्कर के ग्रुप ने यह सब कुछ किया हैं  ताकि कोई गांव का व्यकित जंगल में ना सके और वो लकडियों को काटकर बेच सके।

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सभी लोग गाडी मे बैठ कर जंगल से बाहर आते हैं और कुछ लोग चेक पोस्ट पर उतर जाते हैं और बाकि के गार्डस और अधिकारी गॉव में बने अपने अपने सरकारी क्वाटर मे चले गये दया सिंह और सिफल भी अपने क्वाटर मे लौट आये दया सिंह कुछ देर अपने बेड पर लेट गए और कल रात की घटना के बारे में सोचने लगे तभी उनका मित्र सिफल उनके क्वाटर में आता है और उन्हे गाव के बाजार मे चलने को कहता है दया सिंह बेड से उठकर अपनी यूनिफार्म को उतारक दूसरे साफ कपड़े पहनकर बाजार जाने के लिए तैयार हुए और दोनो अपनी सरकारी मोटर साईकिल पर बैठकर बाजार पहुंचे वहा दोनों ने कुछ सामान खरीदा और  एक भोजनालय में बैठकर खाना खाया कि तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और उनसे जंगल के जानवर के बारे में पुछा दया सिंह ने उन्हे बताया कि अभी जंगल में जाना खतरे से खाली नहीं है क्युकि वह जंगली जानवर अभी पकड़ मे नही आया है

यह सुनकर वह व्यक्ति कहता है "साहब जी जब कोई जानवर होगा तभी तो मिलेगा"

यह बोलकर वह व्यक्ति वहां से चला जाता है दया सिंह और सिफल यह सुनकर असमंजस में पड़ गए और भोजनालय से निकल कर बाहर अपनी मोटर साइकिल पर सवार होकर गांव वापस आये गाव के अंदर आते ही उन्होने देखा कि सभी गाव के लोग अलग अलग गुट बनाकर जंगल के बारे मे बात कर रहे थे कि शायद वह वापस गई है

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सिफल दया सिंह को मोटर साइकिल रोकने को कहता है और दया सिंह मोटर साइकिल को किनारे पर रोक देते हैं और सिफल उतरकर उन व्यकितयो से पुछता है कि आज गाँव के लोग इस तरह से गुट बनाकर क्या बाते कर रहे हो तभी एक व्यक्ति बोलता है "साहब जी क्या आपको नही पता वो चुकी है क्या कल रात आपने वो रोने की आवाज नही सुनी जो रात को जंगल से रही थी यहाँ कई गांव तक वो आवाज सुनी गई है। " सिफल बोलता है वह कौन .? कौन आया है ?

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उस व्यक्ति के चेहरे के भाव पुरी तरह से बदल जाता है व्यक्ति हलकी और अटकती हुई आवाज मे कहता है " उर्वशी"

व्यक्ति इस बात को बोलकर वहाँ से चला जाता है परन्तु सिफल को इस बात को सुनकर बहुत हैरानी होती हैं सिफल वापस से मोटर साइकिल पर सवार हो गया और दया सिंह को क्वाटर पर चलने के लिए बोला थोडी सी पल में दोनों क्वाटर पर पहुंच गए दया सिंह ने पुछा क्या बोला उन सभी लोगों ने कौन वापस गया है ?

सिफल बोलते हैं किसी उर्वशी की बात कर रहे हैं कि वो वापस गई है यह बात सुनकर दया सिंह थोड़े से असमंजस से बोलते हैं लगता है कोई बात है जो शायद हमें पता नही है तभी एक सिपाही दया सिंह के पास आकर उन्हे सेल्यूट करता है और कहता है सर जल्दी से चेक पोस्ट पर चलें वहाँ कुछ मिला है दया सिंह और सिफल मोटर साइकिल पर वापस से सवार होकर चेक पोस्ट की तरफ निकल गया गाँव के बाहर रास्ते में उन्हें एक साधु मिलता है जोकि वही के पास के एक काली मंदिर में रहता था

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साधु तेज तेज चिल्ला कर बोल रहा था कोई भी नही बचेगा सब मरेंगे सब मरेंगे और बस पागलो की तरह यही शब्द दोहराये जा रहा था दया सिंह और सिफल उसे एक झलक देखते हैं और चेक पोस्ट की तरह चले गए वहा पहुंचने पर उन्हें एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिलती हैं जिसे फारेस्ट गार्डस ने कुछ देर पहले रेस्क्यू करके लेकर आये थे।

दया गार्डस से पुछते है कैसे हुआ यह ? गार्डस कहते हैं साहब जी यह हमे जंगल के अंदर घापल और तडपता हुआ मिला यह हमे बोल रहा था भाग जाओं वह चुकी है और यहा इस चेक पोस्ट पर इसे लाते हुए इसकी मृत्यु हो गई सिफल उसके पास जाता है और उसकी पुरे शरीर को देखकर बोलता है ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने इसे खरोच खरोच कर इसकी पेट के अंदर की सारी  अंतड़ियों को बाहर निकाल दिया है उसके पुरे शरीर से खुन बह रहा था और शरीर के अलग अलग भागो को नोच कर खा गया है।

 

आज के इस कहानी का भाग यहीं पर समाप्त होता है इसके अगले भाग मे अवश्य पढ़े कि कैसे उर्वशी के बारे मे कुछ रहसमयी तथ्य का पता चलता है इस कहानी के सभी भाग जल्द ही प्रसारित किये जाएगे

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