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कर्ण पिशाचिनी या उर्वशी- एक सच्ची कहानी Part-5 [अंतिम]

 

Crazyhorrormint फिर से लेकर आया है एक सच्ची कहानी जो कि एक कर्ण पिशाचनी पर आधारित अगर आपने हमारी पिछली कहानी कर्ण पिशाचिनी या उर्वशी- एक सच्ची कहानी Part-4 को पढ़ा होगा तो आपको कर्ण पिशाचनी के बारे मे अवश्य पता चला गया होगा आज के इस कहानी के भाग मे पढ़े कि कैसे उर्वशी के बारे मे कुछ रहसमयी तथ्य का पता चलता है

पिछले भाग मे आपने पढा कि कैसे भुवन को साधु के बारे मे पता चला कि कैसे उसने कर्ण पिशाचनी को कर्णिका के रूप में सिद्ध किया और कर्णिका ने कई लोगो को मार डाला जिसने उसकी हत्या की थी।

अब आगे-----

अचानक भुवन के आदमियों ने कर्णिका पर हमला कर दिया और उसे घसीट कर भुवन के पास ले जाकर पटक दिया तभी भुवन ने कर्णिका के बाल पकड़कर उठाया और करीब से उसके यौवन को देख कर बोला तु इतने दिनो से मेरे नजर मे क्यु नही आई इस गाव मे तेरे जैसी खुबसूरत औरत मुझे कई सदियों से नही दिखी कहाँ छुपी थी तभी दया ने भुवन को उस छोड़ देने को बोला पर भुवन के आदमी ने दया के मुह पर एक बास के बडे से टुकडे से मार कर घायल कर दिया दया के मुह से खुन की धाराएं निकलने लगी।

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तभी कर्णिका ने दया की तरफ देखा और रोना शुरु कर दिया  और एक भयावह सी स्त्री मे बदल गयी और भुवन को धक्का देखकर पल भर मे ही दूर हवा मे फेक दिया।  भुवन को इस बात का जरा सा भी अहसास नही था कि ऐसा कुछ भी होगा। दया एकदम स्तब्ध रह गए कि कर्णिका ही वह उर्वशी और कर्ण पिशाचिनी है कर्णिका एक भयावह रूप ले चुकी थी जिसकी शरीर हल्के काले रंग का हो चुका था जो एक नग्न रूप मे थी और उसके शरीर पर खुन के धब्बे थे जैसे उसने कितनी खुन ने नहा लिया हो कर्णिका का यह कर्ण पिशाचनी वाला रुप देखकर भुवन के सभी आदमी खौफ मे गए तभी उस कर्ण पिशाचनी ने एक खुखार से प्रेत को प्रकट किया जो बिलकुल एक नरक से आया हुआ शैतान जैसा लग रहा था।

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कर्णिका ने उसे आदेश दिया किया कि भुवन और उसके सभी लोगो को मार कर उन सबकी आत्माओं को ले आयो

कर्णिका की आवाज मे से कई लोगो की आवाज रही थी ऐसा लग रहा था जैसे कई सारे लोग एक साथ बोल रहे हो वह पल इतना भयावह हो चुका था कि उसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था हर तरफ डर का माहौल बन गया और उस प्रेत ने सबको मारना शुरू कर दिया हर तरफ से सिर्फ आत्माओं के रोने और चिल्लाने की आवाज रही थी।

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वह प्रेत भी लोगो का शिकार करना शुरू कर दिया प्रेत जीसे भी पकटता उसके शरीर को अपने नाखुनो से उसका शरीर फाड़ देता और उनकी अंदरुनी अंगो को निकाल कर खा जाता और यह देख कर्णिका उन लोगो के ऊपर बैठकर उनके शरीर को फाड़कर खा रही थी और खुन को पी रही थी कर्णिका का यह कर्ण पिशाचनी वाला रुप किसी नरभक्षी देवी की तरह था। जो बस खुन की प्यासी थी। और सभी आदमी जो वहाँ पर आयें थे साधु को मारने वह अब कर्णिका यानि कि कर्ण पिशाचिनी का भोग बन रहे थे वह कर्ण पिशाचिनी का प्रेत सभी लोगो को मारकर उनका शरीर कर्ण पिशाचिनी को सौपने लगा। कर्ण पिशाचिनी एक तेज शैतानी हँसी हसने लगी और भुवन को बोली भुवन तुझे वो दिन याद है जब तुने मुझे अपनी वासना का शिकार बनाया था मै कैसे तड़प रही थी पर तुने मुझे नहीं छोड़ा तुने मुझे तब तक शिकार बनाया जब तक मैने अपनी प्राण नही त्याग दिया इसलिए मैंने भी तेरे परिवार को तड़पा तड़पा कर मारा और अब तेरी बारी है। और हंसने लगी तभी भुवन ने अपनी बंदुक निकाली और अपने बचे हुए आदमियों से कहा कि गोलियां चलाओं और सबको मार दो सभी लोगों ने अन्धाधुन गोलीयां कर्ण पिशाचनी और प्रेत पर चलाई पर उन का कोई फायदा नहीं हुआ तभी उस प्रेत को कर्ण पिशाचनी ने एक खड़ग को दिया और अपनी मर्दाना आवाज मे बोला सब की गर्दन काटकर ले आयो

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सभी लोग इधर उधर भागे पर वह कर्ण पिशाचिनी और प्रेत ने सभी को मार दिया जब भी कोई व्यक्ति भाग कर अपनी जान बचाने की कोशिश करते प्रेत क्षण भर मे उनके सामने प्रक्रट होता और उन्हें खड़ग से मार देता।

तभी वह साधु अपने घर गये और भुवन के आदमियों की लाश को बुरी हालत मे देखकर समझ गए कि कर्ण पिशाचनी अपने बदले की प्यासी है तभी भुवन ने साधु के की तरफ अपनी बंदुक तान दी और चिल्लाया बुढढे सब तेरी वजह से हुआ है मै तुझे जान से मार दुंगा और बंदुक की ट्रिगर को दबाने लगा कि दया ने अपनी बंदुक निकाली और भुवन पर चला दी दया ने दो गोली मारी जो भुवन के हाथ और एक जांघ पर लगी भुवन की गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और बंदुक भी उसके हाथ से गिर गई और वह जैसे तैसे घसीट कर अपनी गाडी तक पहुंचा की तभी प्रेत ने उसके पैर को पकट कर घसीटता हुआ कर्ण पिशाचिनी के पास लाकर पटक दिया

कर्ण पिशाचिनी ने झुककर भुवन को देखा और खुशी से झूम उठी और तेज तेज हसने लगी भुवन अपने आप को घसीट कर पीछे पीछे जा रहा था ताकि वह वहाँ से भाग सके अब भुवन को पता चल चुका था कि अब उसका अंतिम समय नजदीक है वह कर्णिका से माफी मांगने लगा और अपने आपको जिंदा छोड़ देने के गिड़गिड़ाने लगा

तभी कर्णिका ने कहा तुझसे भी मैने ऐसे ही मुझे छोड. देने के लिए बोला था पर तुने हवसपन की सारी हदें पार कर मेरी जान लेली थी और आज मै तुझे मारूंगी और यह बोलकर उस कर्ण पिशाचनी ने अपने नाखुन से भुवन के पुरे शरीर को फ़ाड़ कर टुकड़ों मे बदल दिया। भुवन के पुरे शरीर से खुन बह रहा था और वह असीम पीड़ा से चिल्ला रहा था कुछ देर दर्द से चिल्लाने के बाद भुवन ने अपनी जान वही दे दी। और भुवन की प्राण निकल गए

तभी कर्णिका साधु के पास गई और उनके पैरों को पकड़कर रोने लगी और रोते हुए अपने कर्ण पिशाचिनी से वास्तविक रुप मे गई यह देख दया बिलकुल नि स्तब्ध होकर जमीन पर बैठ कर सिर्फ कर्णिका को ही देख रहे थे।

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तभी कर्णिका दया के पास आई और रोते हुए दया के गालों पर हाथ फेरते हुए बोली मुझे माफ कर दो मै आपको सब कुछ बताना चाहती थी पर ये सब मै आपको कैसे बताती मेरे साथ अन्याय हुआ था मै क्या करती तभी दया ने कर्णिका को अपनी बाहो मे भर लिया और चुप  करवाते हुए बोला तुम्हारी कोई गलती नही है इसने जो भी किया उसका अंजाम यही था। तभी साधु उनके पास आये और दोनो के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया

तभी सिफल भी वहाँ गया और तुरंत ही अपनी पुरी टीम को वहाँ आने के लिए कहा सभी वन अधिकारी ओर गार्डस और गांव के लोग वहाँ जमा हो गए और भुवन और उसके आदमीयो की लाश देखकर सब खौफ और जिज्ञासा मे खडे थे।

तभी एक व्यक्ति ने कहा आखिरकार इस राक्षस का अंत हो ही गया

 

आफिसर्स ने सब की लाश को उनके घर वालो को सौप दिया

कुछ दिन बाद पुरे गांव मे माहोल शांत हो गया सब कुछ साधारण था।

कुछ दिन बाद दया साधु से मिलने गये और पुछा कि कर्णिका कौन है साधु ने उन्हें बताया की मैने उर्वशी को कर्ण पिशाचनी बनाने के बाद उसे बेटी के रूप में सिद्ध किया था इसलिए वो इस वास्तविक रूप मे रहती है और फिर मैने कई सारे तंत्र क्रियाओं के बाद उसे तुम्हे सौप दिया था जब तुम घायल अवस्था में दूसरी बार यहा आये थे। पर वह किसी को भी कोर्ई हानी नहीं पहुंचाएगी क्युकि अब उसका बदला पुरा हो गया है पर उसमे अभी भी बहुत सी शक्तियां हैं जो असीम है। पर तुम्हे कुछ भी नहीं होगा। क्युकि उसने तुम्हे अपना पत्ति मान लिया है

और कुछ दिन बाद दया और कर्णिका ने शादी कर ली और एक सुखी जीवन जीने लगे।

परन्तु दया ने यह बात किसी को भी नहीं बताई कि उर्वशी ही कर्णिका है और कुछ ही दिन बाद दया ने अपना ट्रासंफर दुसरी जगह पर करवा लिया और यह कहानी बस कुछ ही लोगों के बीच सिमट कर रह गई

समाप्त

 

मेरे प्यारे रिडसज उम्मीद है यह कहानी आपको पंसद आयी होगी कर्ण पिशाचनी की और भी कहानियां समय के साथ आती रहेंगी तथा आप भी हमे अपनी कहानी भेज सकते हैं - की और भी स्टोरिज को पढे तथा अपने मित्रो को जरूर share करे

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धन्यवाद

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